विधिक जागरूकता शिविर ने बढ़ाया श्रमिकों का आत्मविश्वास, पर योजनाओं की जानकारी में रही भारी कमी

विधिक जागरूकता शिविर: अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस के अवसर पर 01 मई 2025 को सीधी जिले में आयोजित किया गया। इस शिविर का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को उनके कानूनी अधिकारों और लाभकारी योजनाओं की जानकारी देना था। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त निर्देशों के अंतर्गत हुआ, जिसकी अगुवाई प्रधान जिला न्यायाधीश श्री प्रयाग लाल दिनकर ने की।
कार्यक्रम का संचालन प्रभारी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुश्री सुनीता रावत और जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री मनीष कौशिक द्वारा किया गया। उन्होंने श्रमिकों को संवैधानिक अधिकार, न्यूनतम मजदूरी, समान वेतन, कर्मचारी बीमा योजनाएं, ई-श्रम कार्ड, आयुष्मान भारत योजना, और म.प्र. कर्मकार मंडलों की योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।
विधिक जागरूकता शिविर ने श्रमिकों को दिए कानूनी अधिकारों के ज्ञान के सूत्र
शिविर में श्रमिकों को उनके मौलिक अधिकारों के साथ-साथ श्रम कानूनों की जानकारी दी गई। न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, समान वेतन अधिनियम, कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम 1948 और कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम जैसे कानूनों को सरल भाषा में समझाया गया।
विधिक जागरूकता शिविर में मिली योजनाओं की विस्तृत जानकारी
म.प्र. भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मंडल की योजनाएं, असंगठित श्रमिकों के लिए बीमा, पेंशन और स्वास्थ्य लाभों की जानकारी भी दी गई। इससे श्रमिकों को सरकारी सहायता तक पहुँच बनाने का मार्ग मिला।
विधिक जागरूकता शिविर में निःशुल्क विधिक सहायता का महत्व बताया गया
श्री मनीष कौशिक ने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करता है, जिससे वे अपने हक की लड़ाई बिना आर्थिक बोझ के लड़ सकते हैं।
विधिक जागरूकता शिविर ने खोली जागरूकता की कमी की परतें
हालांकि शिविर सफल रहा, लेकिन इस दौरान यह भी उजागर हुआ कि बड़ी संख्या में श्रमिक अभी तक इन कल्याणकारी योजनाओं से अनजान हैं। यह स्थिति और अधिक जागरूकता अभियानों की आवश्यकता को रेखांकित करती है।




