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रेत माफिया हमला: सीधी में रेंजर पर माफियाओं का घेरा, मीडिया की मौजूदगी से भागे दबंग, पुलिस रही नदारद

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सीधी। रेत माफिया हमला फिर चर्चा में, रेंजर को घेरा गया, ट्रैक्टर छुड़ाने की कोशिश

सीधी जिले के मझौली थाना क्षेत्र में रेत माफिया हमला का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह घटना 15 जून सुबह 5 से 6 बजे के बीच की है, जब रेंजर नीलेश द्विवेदी ने बिना नंबर के स्वराज ट्रैक्टर से हो रहे अवैध रेत परिवहन को रोकने की कोशिश की। लेकिन जैसे ही ट्रैक्टर को मझौली रेंज लाया गया, रास्ते में छुही तिराहा पर कुछ माफियाओं ने महिलाओं के साथ रास्ता रोककर ट्रैक्टर छुड़ाने का प्रयास किया।

 

रेत माफिया हमला: दोबारा घेराबंदी भाजपा मंडल अध्यक्ष के घर के सामने

 

रेत माफिया हमला यहीं नहीं रुका। जब रेंजर ट्रैक्टर लेकर मझौली पहुंचा, तो भाजपा मंडल अध्यक्ष के घर के सामने फिर से बुलेरो और बाइक से रास्ता रोककर ट्रैक्टर छुड़ाने की कोशिश की गई। रेंजर ने इस गंभीर स्थिति की सूचना मझौली पुलिस और स्थानीय मीडिया को दी, लेकिन पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। हालांकि, मीडिया के पहुंचते ही माफिया घबरा गए और अपने वाहन हटाकर भाग निकले। तब जाकर वन विभाग की टीम ट्रैक्टर को रेंज परिसर में ले जाने में सफल हो सकी।

 

रेत माफिया हमला: पुलिस अवकाश में और माफिया सक्रिय

 

रेत माफिया हमला की यह घटना ऐसे समय हुई जब कुछ दिन पहले ही SDOP रोशनी सिंह ने दो ट्रैक्टरों को अवैध रेत परिवहन करते हुए पकड़ा था। माफिया उस कार्रवाई से बौखलाए हुए थे। लेकिन जैसे ही SDOP अवकाश पर गईं, माफियाओं ने मौके का फायदा उठाते हुए रेंजर से ट्रैक्टर छुड़ाने की योजना बनाई। यह एक गंभीर प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है।

 

रेत माफिया हमला: पुलिस की निष्क्रियता पर उठे सवाल

 

इस पूरे रेत माफिया हमला प्रकरण में पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में है। जब रेंजर ने मदद मांगी, तो पुलिस नहीं पहुंची, जबकि मीडिया ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। यह दर्शाता है कि प्रशासनिक सहयोग के बिना रेंजर जैसे अधिकारी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।


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