मध्य प्रदेश

पशुपालन से खेती को मिलेगा नया जीवन: उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल

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भोपाल। मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि पशुपालन को अगर व्यवस्थित और आधुनिक रूप दिया जाए तो यह न सिर्फ किसानों की आय बढ़ा सकता है, बल्कि खेती को भी लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है। वे राजधानी भोपाल के होटल विजय विलास में आयोजित प्रांतीय राजपत्रित पशु चिकित्सक संघ के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

 

श्री शुक्ल ने कहा कि निराश्रित और बीमार गौवंश की सेवा तथा पुनर्वास वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। सरकार इस दिशा में बड़े कदम उठा रही है और पूरे प्रदेश में उन्नत गौशालाओं का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है। उन्होंने बताया कि रीवा जिले के बसामन मामा गौवन्‍य विहार में 7,000 से अधिक निराश्रित गायों को संरक्षण मिल चुका है और शीघ्र ही हिनौती में एक आधुनिक गौशाला शुरू की जाएगी, जिसमें 25,000 गौवंश को रखने की व्यवस्था की गई है।

 

उप मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दूध न देने वाली गायों को भी बेसहारा छोड़ने की मानसिकता बदलनी होगी, क्योंकि उनका गोबर और गौमूत्र भी आर्थिक रूप से उपयोगी है। आधुनिक गौशालाओं में गोबर से खाद, उपयोगी वस्तुएं और सीएनजी जैसे संसाधन तैयार किए जा रहे हैं। पशु चिकित्सकों की सराहना करते हुए उन्होंने उन्हें बेजुबान प्राणियों के लिए “भगवान के समान” बताया।

बाबा साहब गौ संवर्धन योजना से डेयरी को मिलेगी नई उड़ान

पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्यमंत्री लखन पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्राथमिकता सूची में पशुपालन विभाग प्रमुख रूप से शामिल है। बाबा साहब अंबेडकर गौ संवर्धन योजना के तहत न्यूनतम 25 दुधारू पशुओं की एक यूनिट बनाकर डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा दिया जा रहा है। योजना के अंतर्गत अनुदान और ऋण की सुविधा दी जा रही है, जिससे प्रदेश में दूध संग्रहण की क्षमता को प्रतिदिन 50 लाख लीटर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

 

श्री पटेल ने यह भी स्पष्ट किया कि पशु चिकित्सा अधिकारियों को मेडिकल डॉक्टरों की तरह सभी सुविधाएं दी जाएंगी। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जा चुका है। पशु उपचार के लिए प्रदेश में हेल्पलाइन 1962 के वाहनों की संख्या दोगुनी की जाएगी।

बेसहारा गायों को मिलेगा सुरक्षित आश्रय, गौशालाएं बनेंगी तीर्थ स्थल

सरकार की योजना है कि दो वर्षों में सभी बेसहारा गायों को गौशालाओं में व्यवस्थित रूप से आश्रय दिया जाए। इसके लिए प्रदेश के 22 स्थानों पर आधुनिक गौशालाएं विकसित की जा रही हैं। इन गौशालाओं को पर्यटन और तीर्थ स्थलों की तरह विकसित किया जाएगा, ताकि आमजन की भागीदारी भी बढ़े और संस्कृति से जुड़ा यह अभियान व्यापक रूप ले सके।

सम्मेलन में पशु चिकित्सा अधिकारी संघ की प्रमुख मांगों पर चर्चा

कार्यक्रम के दौरान पशु चिकित्सा अधिकारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. मनोज गौतम ने जानकारी दी कि गौशालाओं में गायों के भरण-पोषण के लिए मिलने वाली राशि को 20 रुपए से बढ़ाकर 40 रुपए प्रतिदिन कर दिया गया है। वहीं, डेयरी निर्माण के लिए किसानों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। संयुक्त संचालक पशुपालन डॉ. राजेश मिश्रा ने कहा कि पशुओं से मनुष्य में कई रोग पहुंचते हैं, इसलिए पशुओं का स्वस्थ रहना मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण की दृष्टि से भी अनिवार्य है।

 

इस भव्य आयोजन में रीवा और शहडोल संभाग के सभी जिलों के पशु चिकित्सा अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और सेवानिवृत्त अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यशाला का संचालन श्री अवनीश शर्मा ने किया और अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।


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