सीधी

कागजों में संचालित हो रही है दर्जनों गौशाला, सड़कों पर गौवंश

जिम्मेवार अधिकारियों की अनदेखी पड़ रही भारी

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सीधी। मनरेगा योजना से बनाये गए जिले के एक दर्जन से अधिक गौशालाओं में आवारा मवेशियों के रहने की व्यवस्था शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई है जिसका संचालन ग्राम पंचायत व स्व सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है। जबकि उनके स्वारस्य की देखरेख की जिम्मेवारी पशु चिकित्सा विभाग को सौंपी गई है। लेकिन गौशालाओं में दर्ज संख्या के हिसाब से दी गई जानकारी में व्यापक पैमाने पर गोलमाल उजागर हुआ है। पूर्व में आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में जीवित एवं मृत मवेशियों की संख्या कुछ और ही बताई गई थी वहीं हाल हो में विधान से मांगी गई जानकारी में कुछ और बताया गया है।

 

ज्ञातव्य हो कि उप संचालक पशु चिकित्सा विभाग सीधी से सूचना के अधिकार अधिनियम द्वारा लगातार तीन क्यों के दरमियान तीन बार मवेशियों की संख्या संबंधी जानकारी चाही गई जिसमें प्रत्येक जानकारी का ब्यौरा पृथक-पृथक पाया गया। जिससे यह साफ हो रहा है कि पशु चिकित्सा विभाग गौशालाओं में रहने वाले मवेशियों की चिकित्सा व्यवस्था संबंधी जानकारी सिर्फ कागजों में ही सीमित कर रखी है। यही नहीं कागज भी इनके पास स्थाई ई नहीं है। समय-समय पर गौशालाओं का भौतिक निरीक्षण न करने के चलते इस तरह की भ्रामक आनकारी दी जा रही है। सूत्र बताते है कि गौशालाओं में रहने वाले मवेशियों के चिकित्सा व्यवस्था के नाम पर पशु चिकित्सा विभाग द्वारा पर्यात राशि खर्च की जा रही है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि विभाग उक्क राशि सिर्फ कागजों में ही चिकित्सा सेवा दर्शाकर हजम कर रहा है।

मवेशियों की संख्या में झोलझाल

पशु चिकित्सा विभाग द्वारा जिले में संचालित गौशालाओं की जानकारी में जमकर खेल खेला जा रहा है, हनुमानगढ़ गौशाला में पहले मृतकों की संख्या 63 बताई गई थी फिर 49 बताई गई अब यह संख्या 22 हो गई है। इसी तरह अशासकीय गौशाला गोपालदास आश्रम मणिकूटरामनगर झिरिया का भी मामला प्रकाश में अवगा है जहां 31 दिसंबर 2022 तक मृत मवेशियों की संख्या 29 बताई गई थी अब यह संख्या 22 बताई जा रही है। खास बात यह है कि दी गई जानकारी गौशाला आरंभ से आज दिनांक तक की है। भ्रामक जानकारी से यह स्पष्ट हो रहा है कि विभाग अपने कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही बरत रहा है।

घट रही गौशालाओं की संख्या

मुख्यमंत्री गौ सेवा योजना अन्तर्गत संचालित पंजीकृत गौशालाओं के संबंध में पशु बिकित्सा विभाग द्वारा जानकारी में एक बड़ा खुलाशा यह भी हुआ है कि 18 की संख्या में चल रही गौशालाओं में दो गौशालाओं को बंद कर दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि आवारा मवेशियों की संख्या दिनी दिन बढ़ती जा रही है और गौशालाओं की संख्या घटती जा रही है। ऐसे में आवारा मवेशियों से प्रभावित किसानों को राहत मिलने के बजाय आफत ही दिखाई पड़ रही है। गौशाला बंद होने से आवारा मवेशियों का ताण्डव बना हुआ है।


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