कलेक्ट्रेट में अव्यवस्था का बोलबाला: रजिस्ट्री ऑफिस के बाहर गंदगी, अंदर बेबसी और बिचौलियों का राज

सीधी। जिला कलेक्ट्रेट की ऊपरी मंजिल पर स्थित रजिस्ट्री ऑफिस का हाल बद से बदतर हो चला है। रोजाना सैकड़ों लोग रजिस्ट्री कराने यहां पहुंचते हैं, लेकिन गंदगी, बदबू और कुत्तों के आतंक ने माहौल असहनीय बना दिया है। दूसरी मंजिल तक कुत्तों का पहुंच जाना और अधिकारियों का चुप रहना कई सवाल खड़े करता है। 
रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोग गंदगी और डर के बीच बेबस
कलेक्ट्रेट परिसर में एक ओर कचरे का ढेर लगा है तो दूसरी ओर आवारा कुत्तों का डेरा। बच्चे और महिलाएं असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। भीड़भाड़ के बीच अव्यवस्था इतनी बढ़ चुकी है कि लोग रजिस्ट्री की प्रक्रिया से पहले ही थक जाते हैं।
कचरे का अंबार, जिम्मेदारों की चुप्पी
पान और गुटखा की पीक से दीवारें लाल हो चुकी हैं। सफाईकर्मियों की लापरवाही और प्रशासन की अनदेखी से परिसर गंदगी का केंद्र बन गया है। शिकायतें तो कई हुईं, लेकिन कार्रवाई आज तक नहीं।
देर शाम तक भीड़, पर काम वही जो चढ़ावे से हो
रजिस्ट्री ऑफिस में सुबह से देर शाम तक भीड़ लगी रहती है। लोगों का आरोप है कि जो अतिरिक्त रकम देते हैं, उनका काम जल्दी निपटता है, जबकि बाकी घंटों लाइन में खड़े रहते हैं। सिस्टम में पारदर्शिता की कमी ने आम जनता का भरोसा तोड़ दिया है।
सीसे के पीछे चलता है पूरा खेल
मुख्य रजिस्टार अलग बैठते हैं, जबकि सहायक कर्मचारी सीसे के पीछे लेनदेन करते हैं। अंदर जाने पर पाबंदी है। यही वजह है कि अंदर क्या हो रहा है, किसी को पता नहीं चलता। बिचौलियों के माध्यम से ही काम कराना अब “नियम” बन चुका है।




