रोजगार सहायक को सचिवीय प्रभार दिलाने की योजना पर फिरा पानी अपर कलेक्टर ने रिश्वत का लिफाफा देख भेजा कोतवाली

रोजगार सहायक को सचिवीय प्रभार दिलाने की योजना पर फिरा पानी
अपर कलेक्टर ने रिश्वत का लिफाफा देख भेजा कोतवाली
आरोपी के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने दर्ज किया मामला
सीधी। अपने चहते रोजगार सहायक को सचिवीय प्रभार के साथ साथ वित्तीय प्रभार दिलाने के उद्देश्य से सीईओ जिला पंचायत एवं प्रभारी अपर कलेक्टर को लालच देने की योजना भारी पड़ गई है, अपर कलेक्टर ने रिश्वत देने वाले व्यक्ति के खिलाफ सिटी कोतवाली सीधी में मामला दर्ज कराते हुए गिरफ्तार करा दिया है। इस कार्यवाही की भनक लगते ही समूचे जिले में हड़कंप मच गया है।
ज्ञात हो कि जिले के रामपुर नैकिन विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत रघुनाथपुर निवासी विनोद त्रिपाठी एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य अखिलेश कुशवाहा सोमवार को जिला पंचायत सीईओ अंशुमन राज से मुलाकात करने आए थे, जिस समय उनसे मिलने यह सीधी पहुंचे थे उस समय सीईओ श्री राज प्रभारी अपर कलेक्टर का कार्य संपादित कर रहे थे, इन्हें इस बात की जानकारी लगीं कि सीईओ साहब कलेक्ट्रेट परिसर में बैठे हैं वह भी आ पहुंचे, मिलने की प्रक्रिया के तहत चपरासी को चिट दिया, साहब ने उन्हें बुलाया और उनसे काम की जानकारी चाही, वह दोनों पूर्व से तैयारी अनुसार मिठाई के साथ उसी थैले में रुपयों से भरा लिफाफा भी रख कर अपने काम की बात करने लगे, जब अपर कलेक्टर की नजर थैले पर पड़ी तो उन्होंने पूंछा कि इसमें क्या रखा है तो दबी जुबान यह कह दिया कि मिठाई और उसके एक लिफाफा भी है, यह सुनते ही साहब का गुस्सा सातवें आसमान पर आ गया और उन्होंने तत्काल गार्ड एवं चपरासी को बुलाकर बाहर बैठने का निर्देश दे दिया। हालांकि चेंबर के बाहर निकलते ही अखिलेश कुशवाहा मिठाई एवं रुपयों से भरा लिफाफा ले कर रफूचक्कर हो गया।
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आयें थे प्रभार दिलवाने, पहुंच गए थानें
रघुनाथपुर निवासी विनोद त्रिपाठी के पास ग्राम पंचायत के सरपंच शंकरलाल कोल के लेटर पैड में आवेदन था, जिसमें ग्राम पंचायत रघुुनाथपुर में रोजगार सहायक को सचिवीय एवं वित्तीय प्रभार दिलाये जाने की मांग थी। आवेदन में लेख था कि ग्राम पंचायत के सचिव मनोज कुमार शुक्ला का वित्तीय अधिकार समाप्त हो जाने के कारण पंचायत में कार्य प्रभावित हो रहा है। जिस कारण ग्राम रोजगार सहायक को सचिवीय एवं वित्तीय प्रभार दिलाये जाने की मांग थी। लेकिन इन्हें यह प्रभार दिलाने की सोच भारी पड़ गई, साहब ने प्रभार तो दूर सीधे थाने भेज दिया।
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