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त्रिशूल से प्राणघातक हमला कर घायल करने वाले आरोपी को 05 वर्ष का कठोर कारावास एवं 30,000/- रू. जुर्माना

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त्रिशूल से प्राणघातक हमला कर घायल करने वाले आरोपी को 05 वर्ष का कठोर कारावास एवं 30,000/- रू. जुर्माना

बताया गया कि फरियादी/आहत रामविशाले सिहं गोड़ ने दिनांक 29.08.2010 को चौकी बम्हनी, थाना चुरहट में उपस्थित होकर मौखिक सचूना दी कि वह आज सुबह 8:00 बजे अपने घर से मवेशियों को लेकर चराने दण्डकारण्य तरफ गया था। उसकी औरत जैतुन देवी घर से करीब 11:00 बजे बाल्टी लेकर दण्डकारण्य मंदिर के पास बने कुंआ में पानी भरने गई थी। दण्डकारण्य मंदिर का पुजारी नरहर सिहं पानी भरने से मना करता था, उसकी औरत जैतुन पानी भरकर वापस घर जा रही थी तभी नरहर सिहं त्रिशूल लेकर दौडा और उसकी औरत को त्रिशलू से मारपीट करने लगा। मारपीट करते देखकर वह बीच-बचाव को दौडा तो उसकी औरत को छोडकर नरहर सिंह गोड मॉ-बहन की बुरी-बुरी गालियां देकर प्राणघातक हमलाकर त्रिशूल से उसके पेट में मारा जिससे आंत बाहर निकल आई और वह गिर गया। हल्ला गोहार सुनकर राजकली सिह गोड व हरिपाल सिहं दौड कर आये तब अभियुक्त नरहर सिहं गोड त्रिशलू लेकर भाग गया। उक्त मारपीट से उसके पेट, दाहिने हाथ के पखोरा, दाहिने पैर की जांघ एवं उसकी औरत जैतुन सिहं गोड के बायें हाथ की कलाई , दाहिने हाथ की टिहुनी, दोनों पैर के घुटना के नीचे, पीठ, बाये तरफ की पसली में काफी चोटे आई और खून बहने लगा। उक्त सूचना के आधार पर चैकी बम्हनी में अभियुक्त के विरूद्ध प्रथम सूचना प्रतिवेदन क्रमांक 036/10, धारा 294,323,506,307 भा.दं.सं. दर्ज किया गया एवं आधार पर थाना चुरहट में अभियुक्त के विरूद्ध अपराध क्रमांक 383/2011 अन्तर्गत धारा 294,323,506,307 भा.दं. सं. प्रथम सचूना रिपोर्ट पंजीबद्ध कर प्रकरण विवचेना में लिया गया। विवेचना उपरांत अभियोग पत्र माननीय सत्र न्यायालय सीधी के समक्ष प्रस्तु्त किया गया, जिसके न्यायालयीन सत्र प्र.क्र. 400027/11 में शासन की ओर से सशक्त पैरवी करते हुए अपर लोक अभियोजक श्री बृजेश किशोर पाण्डेय द्वारा अभियुक्त को दोषी प्रमाणित कराया गया जिसके परिणामस्वरूप माननीय प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश की न्यायालय के द्वारा अभियुक्त नरहर सिहं गोड़ पिता सुखदेव सिहं गोड़ उम्र-72 साल, निवासी ग्राम कुशमहर, थाना चुरहट, जिला-सीधी (म.प्र.) को धारा 307 भा.दं. सं. के आरोप में 05 वर्ष के सश्रम कारावास एवं बीस हजार रूपये के अर्थदंड एवं धारा 324 भा.दं.सं. के आरोप में 02 वर्ष के सश्रम कारावास एवं दस हजार रूपये अर्थदण्ड की सजा से दण्डित किया गया।


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