डेवा पंचायत में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: पुराने तालाब को बताया नया, लाखों के भुगतान पर उठे सवाल

सीधी। जिले के वनांचल क्षेत्र कुसमी जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत डेवा एक बार फिर वित्तीय अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में है। ग्रामीणों ने पंचायत में कराए गए विकास कार्यों की गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सनोहर नाला स्थित जिस तालाब को पंचायत द्वारा “नवीन तालाब निर्माण” दर्शाया गया है, वह वास्तव में 40 से 50 वर्ष पुराना तालाब है। आरोप है कि वर्ष 2025 और 2026 में केवल सीमित स्तर पर जेसीबी और ट्रैक्टर के माध्यम से मिट्टी खुदाई का कार्य कराया गया, लेकिन बाद में इसे नवीन तालाब निर्माण परियोजना बताकर लाखों रुपये की स्वीकृति और भुगतान दर्शा दिया गया।
सूचना पटल के अनुसार इस कार्य के लिए लगभग 18.39 लाख रुपये की तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति तथा मजदूरी मद में बड़ी राशि का प्रावधान दर्शाया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि कार्यस्थल पर मजदूरों की भागीदारी नगण्य रही और अधिकांश काम मशीनों से कराया गया। ऐसे में रोजगार सृजन और श्रम आधारित कार्यों की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्राम विकास निधि के भुगतान पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों ने पंचायत में पांचवें राज्य वित्त आयोग की राशि के उपयोग को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कुछ भुगतान प्रकरणों में एक ही बिल को अलग-अलग नामों से दोबारा दर्ज कर भुगतान किए जाने की आशंका है। आरोप है कि लाखों रुपये के भुगतान में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं, जिनकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
टैंकर मरम्मत और बोरी बंधान के नाम पर खर्च पर विवाद
स्थानीय लोगों का दावा है कि पंचायत अभिलेखों में टैंकर मरम्मत और बोरी बंधान जैसे कार्यों के नाम पर भुगतान दिखाया गया है, जबकि ग्रामीणों को ऐसे कार्यों की कोई जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि वर्षों से पंचायत का टैंकर उपयोग में नहीं है और बोरी बंधान कार्य भी क्षेत्र में दिखाई नहीं देता।
ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीण महावीर यादव, बृजलाल बैगा और रामनरेश गुप्ता सहित कई लोगों ने आरोप लगाया कि पंचायत में विभिन्न योजनाओं के नाम पर वित्तीय गड़बड़ियां की गई हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
जांच के संकेत
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जनपद पंचायत कुसमी के सीईओ ज्ञानेंद्र मिश्रा ने कहा कि शिकायत और आरोपों की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि जांच में अनियमितताएं पाई जाती हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ग्राम पंचायत डेवा में लगाए गए इन आरोपों ने स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें प्रशासनिक जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं।




