6 करोड़ 28 लाख का बस स्टैंड बदहाल, गंदगी और अव्यवस्थाओं पर शिवसेना ने उठाए सवाल

सीधी। मिनी स्मार्ट सिटी योजना के तहत करीब 6 करोड़ 28 लाख रुपये की लागत से निर्मित सीधी का अंतरराज्यीय न्यू बस स्टैंड अब बदहाली, गंदगी और अव्यवस्थाओं का शिकार होता नजर आ रहा है। बस स्टैंड की खराब स्थिति को लेकर शिवसेना ने जिला एवं नगर प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
शिवसेना के प्रदेश उपाध्यक्ष Vivek Pandey एवं जिला अध्यक्ष बेनाम सिंह ने बस स्टैंड परिसर का निरीक्षण कर नगर पालिका परिषद सीधी और जिम्मेदार अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं।
बस स्टैंड में गंदगी और अव्यवस्था
निरीक्षण के दौरान बस स्टैंड परिसर में जगह-जगह कचरे के ढेर, शराब की खाली बोतलें और गंदगी फैली मिली। यात्री प्रतीक्षालय, प्लेटफॉर्म और टिकट घर के आसपास भी अव्यवस्थाएं नजर आईं। शिवसेना नेताओं का आरोप है कि परिसर में असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों की गतिविधियां बढ़ गई हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
“व्यापारी खुद करा रहे सफाई”
प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे ने कहा कि स्थानीय व्यापारी अपनी जेब से पैसे खर्च कर साफ-सफाई कराने को मजबूर हैं, जबकि यह जिम्मेदारी नगर पालिका की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की अनदेखी के कारण करोड़ों की परियोजना धीरे-धीरे बदहाल होती जा रही है।
शौचालयों में ताले, सुविधाओं का अभाव
बस स्टैंड में बने शौचालय बंद पड़े होने से यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं पेयजल, सुरक्षा और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं।
प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
शिवसेना नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक निरीक्षण और दावों के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। उनका कहना है कि अधिकारी केवल निरीक्षण और फोटो तक सीमित हैं, जबकि जमीनी हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं।
सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
शिवसेना ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बस स्टैंड परिसर में नियमित साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था और मूलभूत सुविधाएं बहाल नहीं की गईं तो जिला एवं नगर प्रशासन के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।
शिवसेना की प्रमुख मांगें
- बस स्टैंड परिसर में तत्काल साफ-सफाई अभियान चलाया जाए
- शौचालयों के ताले तुरंत खोले जाएं
- यात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाएं बहाल की जाएं
- सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए
- असामाजिक गतिविधियों पर रोक लगाई जाए
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर की छवि और यात्रियों की सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक प्रभावी कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे हैं।




