सीधी नगर पालिका भ्रष्टाचार विवाद: CMO पर PF और 18 लाख एरियर रोकने के आरोप, कर्मचारी परेशान
सीधी नगर पालिका भ्रष्टाचार विवाद: PF रोका, 18 लाख एरियर भी नहीं मिले—कर्मचारी बोले ‘हमारी कमाई गायब हो रही है’

सीधी : सीधी नगर पालिका भ्रष्टाचार को लेकर आउटसोर्स कर्मचारियों में नाराज़गी चरम पर है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि दो साल से PF समय पर जमा नहीं हो रहा, ERIS अपडेट नहीं है, वेतन डेढ़-दो महीने की देरी से मिल रहा है और हाल ही में जारी किए गए 18 लाख के एरियर भी उन तक नहीं पहुंचे। कर्मचारियों ने इसे सीधी नगर पालिका में चल रही गंभीर वित्तीय अनियमितता बताया।
आरोपों के मुताबिक, नगर पालिका CMO मिनी अग्रवाल और आउटसोर्स एजेंसी के बीच खातों में गड़बड़ी के आरोप सबसे अधिक चर्चा में हैं। हालांकि CMO की ओर से अभी तक किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया की पुष्टि नहीं हो सकी है।
PF न जमा, ERIS अपडेट नहीं—कर्मचारी बोले “दो साल से हमारा हक अटका हुआ है”
कर्मचारियों के अनुसार:
- 2022 से PF नियमित जमा नहीं
- ERIS पोर्टल अपडेट नहीं
- कई कर्मचारियों के खाते में मासिक कटौती दिखाई ही नहीं दे रही
- वेतन 1.5–2 महीने की देरी से मिलता है
कर्मचारियों का कहना है कि नगरपालिका और एजेंसी दोनों फ़ैसले एक-दूसरे पर डाल देते हैं, जबकि नुकसान सिर्फ कर्मचारियों का हो रहा है।
18 लाख एरियर रिलीज हुए, लेकिन कर्मचारियों तक नहीं पहुंचे—गंभीर सवाल खड़े
राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के प्रदेश महासचिव सुनील चौधरी ने दावा किया कि:
- 126 कर्मचारियों के लिए दो महीने पहले 18 लाख रुपये एरियर भेजे गए
- किसी कर्मचारी को एक रुपये तक नहीं मिला
- राशि कर्मचारियों तक क्यों नहीं पहुंची, इसका जवाब कोई नहीं दे रहा
उन्होंने इसे सीधा आर्थिक अपराध बताते हुए CMO को निलंबित करने की मांग की है।
नगर पालिका की गाड़ियों पर सवाल—“तेल सरकारी, इस्तेमाल निजी?”
कई कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि नगरपालिका की गाड़ियों का डीज़ल सार्वजनिक कार्यों के बजाय निजी यात्राओं में ज्यादा खर्च होता है। कर्मचारियों के मुताबिक:
- “सकोरे में पानी भरने की मंजूरी मुश्किल
- लेकिन वाहन नपा सीमा से ग्वालियर तक जाते हैं”
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन कर्मचारियों में असंतोष साफ दिखाई देता है।
टेंडर विवाद: नई कंपनियों के टेंडर नहीं खुले, पुरानी एजेंसी जारी—वेतन अटका
आरोप यह भी हैं कि:
- आउटसोर्स कंपनी Ethos Security Services का टेंडर समाप्त हो चुका
- नई कंपनियों ने निविदा डाली, लेकिन खोली नहीं गई
- परिणामस्वरूप अक्टूबर का वेतन भी अटक गया
कर्मचारियों का कहना है कि विभाग चुप है और उन्हें रोजमर्रा का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
आवाज़ उठाने पर नौकरी जाने का डर—कर्मचारी खामोश क्यों?
कई कर्मचारियों ने दावा किया कि शिकायत करने पर:
- नौकरी से निकालने की चेतावनी दी जाती है
- कुछ कर्मचारियों को हटाया भी गया
जिले में चर्चा है कि नगरपालिका में नौकरी टिकाने के लिए काम से ज्यादा “चुप रहने” की मजबूरी है।
आगे क्या?
कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि:
- PF की मासिक ERIS रिपोर्ट अनिवार्य की जाए
- PF लेट जमा करने पर सख्त कार्रवाई
- सभी कर्मचारियों को PF अपडेट का SMS अलर्ट
कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है—
“PF हक है, उपकार नहीं।”
नगर पालिका में लगे आरोप गंभीर हैं। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इन दावों पर क्या कार्रवाई करता है, या मामला फिर किसी नाली की तरह बहकर शांत हो जाएगा।
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