हत्या के तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा

सीधी। जिले के चुरहट थाना क्षेत्र में हुए हत्या के एक मामले में अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
घटना का विवरण
मामला 4 अप्रैल 2023 का है, जब फरियादी विजय साकेत ने चौकी बम्हनी, थाना चुरहट में अपने भाई अजय साकेत की आकस्मिक मृत्यु की सूचना दी थी। विजय ने बताया कि उसका बड़ा भाई अजय, जो गुजरात में मजदूरी करता था, कुछ दिन पहले ही गांव लौटा था। 3 अप्रैल 2023 की रात 9 बजे वह अपने दोस्त के साथ घर लौट रहा था, तभी उसने देखा कि उसका भाई अजय साकेत सड़क किनारे खड़ा था। उसके साथ सुग्रीव उर्फ दरवारी साकेत और एक अन्य युवक मौजूद था। जब विजय ने अपने भाई को घर चलने को कहा, तो सुग्रीव ने कहा कि वह उसे बाद में घर पहुंचा देगा।
अगली सुबह विजय के बड़े पिता रामसुमिरन साकेत ने सूचना दी कि अजय साकेत का शव छोटेलाल जायसवाल के खेत में पड़ा है। मौके पर पहुंचने पर देखा गया कि अजय मृत अवस्था में पड़ा था, उसके गले पर फांसी के निशान थे और उसका जींस का पैंट आधा उतरा हुआ था। इस पर पुलिस ने धारा 174 के तहत मर्ग कायम कर जांच शुरू की।
जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया
मर्ग जांच में पाया गया कि अजय साकेत की गला घोंटकर हत्या की गई थी। इसके आधार पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया। विवेचना के दौरान संदेह के घेरे में आए आरोपियों रजनीश साकेत, संजीव उर्फ संजू साकेत और सुग्रीव उर्फ दरवारी साकेत को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई, जहां उन्होंने अपराध स्वीकार कर लिया।
पुलिस ने आरोपियों के बयान दर्ज कर साक्ष्य जुटाए और मामले को न्यायालय में प्रस्तुत किया। शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक बृजेश किशोर पाण्डेय एवं आदित्य प्रताप सिंह ने अदालत में सशक्त पैरवी की।
अदालत का फैसला
माननीय प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश, सीधी की अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए—
1. रजनीश साकेत (27 वर्ष, निवासी मड़रिया, थाना कोतवाली, सीधी)
2. संजीव उर्फ संजू साकेत (28 वर्ष, निवासी कमर्जी पटपरा, थाना कमर्जी, सीधी)
3. सुग्रीव उर्फ दरवारी साकेत (30 वर्ष, निवासी बम्हनी, थाना चुरहट, सीधी)
को धारा 302/34 भादवि के तहत आजीवन सश्रम कारावास और 5,000 रुपये जुर्माना तथा धारा 201 भादवि के तहत 1 वर्ष का सश्रम कारावास और 2,500 रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।
न्याय के इस फैसले से मृतक के परिजनों को राहत मिली है, वहीं यह फैसला समाज के लिए एक संदेश भी है कि अपराधियों को कानून से बचना असंभव है।




