फर्जी डिग्री और मौतों से घिरी चौंकाने वाली कहानी – डॉक्टर नरेंद्र यादव उर्फ एन जॉन केम की सच्चाई आई सामने!

फर्जी डॉक्टर नरेंद्र यादव की गिरफ्तारी ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक सतर्कता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में हार्ट स्पेशलिस्ट के तौर पर कार्यरत रहे नरेंद्र यादव उर्फ एन जॉन केम को फर्जी डिग्री और इलाज में लापरवाही के आरोप में दमोह पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
फर्जी डॉक्टर नरेंद्र यादव पर लगा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की मौत का आरोप
फर्जी डॉक्टर नरेंद्र यादव के खिलाफ सबसे गंभीर आरोप पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के इलाज में लापरवाही का है। उनके बेटे डॉ. प्रदीप शुक्ल ने बिलासपुर के सरकंडा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। जांच के बाद पता चला कि इलाज के दौरान डॉक्टर नरेंद्र की भूमिका संदिग्ध रही, जिससे उनकी मृत्यु हुई।
फर्जी डॉक्टर नरेंद्र यादव की डिग्री और दावा
फर्जी डॉक्टर नरेंद्र यादव ने पुलिस पूछताछ में दावा किया कि उसने एमबीबीएस कोलकाता से और पीजी की पढ़ाई दार्जिलिंग से की है। इसके अलावा उसने यूके और यूएस में काम और पढ़ाई करने का भी उल्लेख किया। लेकिन दस्तावेजों की जांच में इन दावों की सच्चाई सामने आनी बाकी है। पुलिस ने संबंधित संस्थानों से प्रमाणिकता की जांच शुरू कर दी है।
फर्जी डॉक्टर नरेंद्र यादव को पहले भी मिल चुकी थी सजा
फर्जी डॉक्टर नरेंद्र यादव का नाम 2014 में भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI) की सूची में सबसे ऊपर था, जहां उसे व्यवसायिक कदाचार का दोषी पाया गया था। इस कारण उसका रजिस्ट्रेशन पांच साल के लिए निलंबित कर दिया गया था। यह मामला 2018 में लोकसभा में भी उठाया गया था, जिससे स्पष्ट होता है कि मामला पहले से गंभीर था लेकिन कार्रवाई में ढिलाई रही।
फर्जी डॉक्टर नरेंद्र यादव की गिरफ्तारी से हड़कंप
फर्जी डॉक्टर नरेंद्र यादव वर्तमान में दमोह के मिशन अस्पताल में कार्यरत था, जहां मरीजों की लगातार मौतों के बाद डिग्री पर शक जताया गया। इसके बाद दमोह पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया और जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया। पुलिस अब अस्पताल से जुड़ी उसकी भर्ती प्रक्रिया और दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।




