धान में पत्ती लपेटक कीट की आशंका, कृषि विभाग ने किसानों को किया सतर्क

सीधी। धान की फसल में पत्ती लपेटक (लीफ फोल्डर) कीट के संभावित प्रकोप को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। कलेक्टर विकास मिश्रा के निर्देश पर कृषि विभाग के अधिकारियों ने जिले के सभी विकासखंडों में खेतों का भ्रमण कर धान की फसल का निरीक्षण किया और किसानों को कीट नियंत्रण के संबंध में तकनीकी जानकारी दी।
उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास आर.एस. गुप्ता सहित विभागीय अधिकारियों ने किसानों के साथ खेतों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी कि पत्ती लपेटक के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नियंत्रण के उपाय अपनाएं, ताकि फसल को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
पत्ती लपेटक से ऐसे प्रभावित होती है धान की फसल
कृषि विभाग के अनुसार पत्ती लपेटक कीट धान की पत्तियों को आपस में जोड़कर लपेट लेता है और इनके भीतर छिपकर पत्ती के हरे भाग को खुरचकर खाता है। इसके कारण पत्तियों पर सफेद एवं पारदर्शी धारियां दिखाई देने लगती हैं। प्रकोप बढ़ने पर खेत का बड़ा हिस्सा सफेद अथवा झुलसा हुआ नजर आ सकता है।
कीट के अधिक प्रकोप से पौधों की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे धान की पैदावार में कमी आ सकती है।
किसानों को दिए गए नियंत्रण के उपाय
कृषि विभाग ने किसानों को खेत एवं मेड़ों को साफ रखने तथा खरपतवारों को नष्ट करने की सलाह दी है। लपेटी हुई पत्तियों को कीट सहित तोड़कर नष्ट किया जा सकता है। इसके अलावा खेत में रस्सी चलाकर सुंडियों को पानी में गिराने का उपाय भी अपनाया जा सकता है।
अधिकारियों ने धान की फसल में नाइट्रोजन एवं यूरिया का आवश्यकता से अधिक प्रयोग नहीं करने की विशेष सलाह दी है।
यदि पत्ती लपेटक का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर (ETL), यानी प्रति पौधा 2-3 प्रभावित पत्तियों से अधिक पाया जाता है, तो कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित कीटनाशकों में से किसी एक का निर्धारित मात्रा में उपयोग किया जा सकता है।
विभाग द्वारा बताए गए विकल्पों में क्लोरोपायरीफॉस 20 प्रतिशत ईसी 500 मिलीलीटर प्रति एकड़, कार्टेप हाइड्रोक्लोराइड 50 प्रतिशत एसपी 400 ग्राम प्रति एकड़, क्लोरांट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी 60 मिलीलीटर प्रति एकड़ अथवा फिप्रोनिल 5 प्रतिशत एससी 400 से 500 मिलीलीटर प्रति एकड़ शामिल हैं।
कृषि विभाग ने कीटनाशक का छिड़काव 150 से 200 लीटर पानी प्रति एकड़ में मिलाकर शाम के समय करने की सलाह दी है। किसानों से नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करने और कीट के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तत्काल आवश्यक नियंत्रण उपाय अपनाने की अपील की गई है।
विभाग ने किसानों से कहा है कि प्रकोप की स्थिति में अपने निकटतम कृषि कार्यालय अथवा कृषि विज्ञान केंद्र से फसल की स्थिति के अनुसार तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त करें।




