सीधी जिले में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की बड़ी हड़ताल: अपनी मांगों के लिए बुलंद किया आवाज, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित

सीधी। सीधी जिले में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल सोमवार से जोर पकड़ गई है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संविदा स्वास्थ्य कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने के बाद कर्मचारियों ने सीएमएचओ कार्यालय के बाहर जोरदार नारेबाजी कर अपनी मांगों के प्रति प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया।
संविदा कर्मियों का कहना है कि कोरोना काल में उन्होंने जान की परवाह किए बिना सेवा दी, लेकिन अब तक उनके योगदान को उचित मान्यता और स्थायित्व नहीं मिला है।
सीधी जिले में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल के प्रमुख कारण
सीधी जिले में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल के पीछे कई अहम कारण सामने आए हैं। कर्मचारियों ने विभाग में रिक्त पदों पर 50 प्रतिशत संविदा कर्मियों को नियमित करने, अर्जित अवकाश और मेडिकल अवकाश संबंधी फैसलों को वापस लेने जैसी प्रमुख मांगें रखी हैं। साथ ही अनुबंध प्रथा और अप्रेजल जैसी व्यवस्थाओं को खत्म करने की भी जोरदार मांग की जा रही है।
सीधी जिले में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
सीधी जिले में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखने लगा है। ओपीडी सेवाओं से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक कई जगह मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अगर यह हड़ताल लंबी चली, तो जिले में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा सकती हैं।
सीधी जिले में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल पर कर्मचारियों की मांगें
सीधी जिले में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं हैं:
– विभाग में रिक्त पदों का 50% संविलियन कर नियमितीकरण किया जाए।
– अर्जित अवकाश और मेडिकल अवकाश की सुविधाओं को पृथक करने का निर्णय रद्द हो।
– अनुबंध प्रणाली और अप्रेजल प्रथा को समाप्त किया जाए।
– सेवा निवृत्ति की आयु 62 वर्ष निर्धारित हो।
– एनपीएस, ग्रेच्युटी, स्वास्थ्य बीमा एवं डीए की सुविधाएं दी जाएं।
– निष्कासित सपोर्ट स्टाफ और मलेरिया एमपीडब्ल्यू की एनएचएम में पुनः बहाली की जाए।
संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी सभी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।




