गोपाल दास बांध में छठ पूजा के लिए उगते सूर्य को अर्घ्य देने उमड़ी मातृ शक्तियों की भीड़*

*गोपाल दास बांध में छठ पूजा के लिए उगते सूर्य को अर्घ्य देने उमड़ी मातृ शक्तियों की भीड़*
*लीनेस क्लब कामाख्या सीधी ने की छठ पूजन की भव्य व्यवस्था*
*उगते सूर्य को अर्घ्य देती मातृ शक्तियों के साथ सीधी सांसद डॉ. राजेश मिश्र ने छठ मैया और सूर्यदेव से लिया आशिर्वाद*
*सूर्यदेव और छठ मैया का भाई बहन का है पवित्र रिश्ता डॉ.राजेश मिश्र*
*रिपोर्ट*👉 अरुण मिश्रा
सीधी l के स्थानीय गोपाल दास बांध में ढलती शाम तक शहर की महिलाएं छठ पूजन करती रहीं, छठ पूजन को लेकर शहर के लोगों में काफ़ी उत्साह देखने को मिला। इस पवित्र त्यौहार में जहां देश विदेश के कोने-कोने में छठी मैया की पूजा अर्चना की जा रही थी वहीं सीधी की मातृ शक्तियों ने भी बढ़ चढ़कर त्यौहार मनाया। लीनेस क्लब कामाख्या सीधी के विशेष प्रयास और मिश्रा नर्सिंग होम, अक्षत रेसीडेंसी व इन्द्रवती नाट्य समिति के सहयोग से मा. डॉ.राजेश मिश्र सांसद सीधी के मार्गदर्शन में वृहद व्यवस्था की गई थी जहां शहर की मातृ शक्तियों की भीड़ इकट्ठी होकर एक साथ छठी मैया का पूजन किया और 04 बजे भोर में पुनः बांध पहुंचकर उगते सूर्यदेव को अर्घ्य दिया।इस अवसर पर सीधी सांसद डॉ.राजेश मिश्र ने भी मातृ शक्तियों के साथ छठ मैया और सूर्यदेव का आशिर्वाद लिया तथा सीधी की जनता की सुख समृद्धि की कामना की साथ ही युवाओं के प्रेरणा श्रोत डॉ.अनूप मिश्र भी मौजूद रहे।छठ पूजन को लेकर सीधी सांसद ने कहा कि सूर्यदेव व छठ मैया का भाई बहन का पवित्र रिश्ता है जो हमें यह संदेश देता है कि हम विश्व की सभी नारी और पुरुष इसी तरह रिश्तों को संजोकर रखें। कार्तिक मास की चतुर्थी तिथि से सप्तमी तिथि को उगते सूर्य को अर्घ्य देने तक छठ पर्व मनाया जाता है। इस दौरान भगवान भास्कर और छठी मैया की पूजा अर्चना की जाती है। छठ पूजा खास तौर पर संतान की कामना और लंबी उम्र के लिए की जाती है। छठी मैया सूर्यदेव की बहन हैं और इस पर्व पर इन दोनों की पूजा अर्चना की जाती है।छठ पूजन की अलग-अलग मान्यताएं व कहानियां लोक में प्रचलित हैं छठ महापर्व के इतिहास की बात करें, तो पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, माता सीता जब श्रीराम के साथ वनवास पर थीं, तब उन्होंने पहली बार मुंगेर के तट पर ही छठ पूजन किया था। इसके बाद से छठ पूजन की शुरुआत हुई थी। ऐसे में पूरे बिहार में यह पर्व नहीं, बल्कि महापर्व है, जिसके लिए हर साल लाखों श्रद्धालु बिहार के तटों पर जुटते हैं। एक कथा के अनुसार, महाभारत काल में द्रौपदी परिवार की सुख-शांति और रक्षा के लिए छठ का पर्व बनाया था। जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए, तब द्रौपदी ने छठ व्रत रखा। उनकी मनोकामनाएं पूरी हुईं और पांडवों को राजपाट वापस मिल गया। लोक परंपरा के अनुसार, सूर्य देव और छठी मईया का संबंध भाई-बहन का है। इस अवसर पर कार्यक्रम को सफल बनाने में लीनेस क्लब कामाख्या की अध्यक्ष डॉ.बीना मिश्रा, सचिव डॉ.सुनीता तिवारी,तारा तिवारी, विभा बघेल,नम्रता सिंह,शर्मिला सिंह,उर्मिला सिंह, रचना राजे सिंह,अक्षत रेसीडेंसी से राजेश सिंह बब्बू व सतीश द्विवेदी एवं इन्द्रवती नाट्य समिति से नीरज कुंदेर, रोशनी प्रसाद मिश्र व रजनीश जायसवाल की विशेष भूमिका रही।उगते सूर्य को अर्घ्य देने शहर की हजारों मातृ शक्तियां एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।




