रिश्वत मांगने के आरोप में पटवारी निलंबित, लंबित प्रकरणों पर एसडीएम की बड़ी कार्रवाई

सीधी। जिले के रामपुर नैकिन तहसील क्षेत्र में पदस्थ एक पटवारी को रिश्वत मांगने, राजस्व प्रकरणों में अनावश्यक विलंब करने और शासकीय कार्यों में लापरवाही बरतने के आरोपों के बाद निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई ग्रामीणों की शिकायतों और प्रशासनिक जांच के आधार पर की गई है।
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार खड्डी खुर्द एवं खड्डी कला हल्के में पदस्थ पटवारी बृजेश कुमार प्रजापति के खिलाफ क्षेत्रीय ग्रामीणों ने नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और अन्य राजस्व कार्यों में देरी किए जाने की शिकायत की थी। शिकायतों में कार्यों के बदले रिश्वत मांगने के आरोप भी लगाए गए थे।
क्षेत्र भ्रमण के दौरान सामने आईं शिकायतें
बताया गया कि 6 जून को क्षेत्र भ्रमण के दौरान ग्रामीणों ने पटवारी के कार्य व्यवहार को लेकर शिकायतें दर्ज कराईं। मामले को गंभीरता से लेते हुए नायब तहसीलदार वृत्त हनुमानगढ़ से जांच प्रतिवेदन मांगा गया।
जांच के दौरान एक बंटवारा प्रकरण में फर्द तैयार करने के बदले एक लाख रुपये मांगने का आरोप सामने आया। वहीं एक अन्य शिकायत में सीमांकन कार्य के लिए 10 हजार रुपये मांगने की बात कही गई। दोनों मामलों में संबंधित राजस्व प्रकरण लंबे समय से लंबित पाए गए।
कई राजस्व प्रकरण और शिकायतें थीं लंबित
जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित पटवारी के क्षेत्र में सीएम हेल्पलाइन की 18 शिकायतें लंबित थीं। इसके अलावा नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और बेदखली से जुड़े कई प्रकरणों में समय पर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किए गए थे।
प्रशासन के अनुसार पूर्व में जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब भी प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसे वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना माना गया।
तत्काल प्रभाव से निलंबन
जांच प्रतिवेदन, क्षेत्रीय शिकायतों और प्रशासनिक समीक्षा के बाद एसडीएम विकास कुमार आनंद ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत पटवारी बृजेश कुमार प्रजापति को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय रामपुर नैकिन निर्धारित किया गया है। नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
जवाबदेही का सख्त संदेश
प्रशासन की इस कार्रवाई को राजस्व विभाग में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आमजन से जुड़े मामलों में लापरवाही और अनियमितता किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।




