इंदौर पुलिस पर हमला या नाटक? आरोपी ‘घायल’, लेकिन मेडिकल जांच में फिट!

इंदौर।शहर में हाल ही में हुए पुलिस हमले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाणगंगा थाना क्षेत्र के अर्नासला पुलिस स्टेशन पर 5 फरवरी को सीसी इक्का पर विकास डाबी, अरविंद, रवि और विकास ने हमला कर दिया था। इस हमले ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया।
पुलिस ने असली को नकली बताया
हमले के बाद शराब के नशे में धुत सिद्धार्थ ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए दावा किया कि आरोपी असली नहीं, बल्कि नकली हैं। इस घटना के बाद पुलिस ने विकास और रवि को कट्टरपंथी तत्वों के निशाने पर लेते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, यह दावा किया गया कि आरोपी खुद को बचाने के प्रयास में घायल हुए थे।
मेडिकल जांच में आरोपी स्वस्थ निकले
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के हाथ-पैरों में पट्टी बंधी हुई थी और वे लंगड़ाते हुए नजर आए। हालांकि, जब उन्हें सेंट्रल जेल ले जाया गया और मेडिकल जांच कराई गई, तो वे पूरी तरह स्वस्थ पाए गए। विद्वानों का कहना है कि न तो उनके हाथों में पट्टी थी और न ही किसी चोट का निशान।
लूट-चाकूबाजी मामलों में भी बचाव का नया तरीका?
ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां बदमाश खुद को बचाने के लिए झूठे तरीके अपनाते हैं। अपराधियों द्वारा खुद को घायल बताकर पुलिस से बचने की कोशिश करना कोई नई बात नहीं है। इसी क्रम में कुणाल के नामांकन के बाद मैसाचुसेट्स क्षेत्र में मार्च निकाला गया, जहां संदिग्ध अपराधियों के हाथ-पैरों पर लेप लगा होने के बावजूद मेडिकल जांच में वे पूरी तरह स्वस्थ पाए गए।
इस घटना के बाद अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर अमित सिंह ने जांच के आदेश दे दिए हैं। पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच के नतीजे क्या सामने आते हैं।




