अमेठी: ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर साइबर ठगी, पुलिस ने पीड़ित को वापस दिलाए 35 हजार

अमेठी। साइबर अपराधियों द्वारा ‘डिजिटल अरेस्ट’ का भय दिखाकर ठगी करने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कमरौली थाना क्षेत्र के उतेलवा निवासी संतोष कुमार श्रीवास्तव को एक फर्जी पुलिस अधिकारी ने वीडियो कॉल कर उनके बेटे को दुष्कर्म के केस में फंसाने की धमकी दी और उनसे 35 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए। हालांकि, पीड़ित की शिकायत पर सक्रिय हुई पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ठगी गई पूरी रकम वापस दिलाने में सफलता हासिल की।
कैसे हुई ठगी?
करीब दो महीने पहले संतोष श्रीवास्तव को एक अनजान नंबर से वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और कहा कि उनका बेटा, जो दिल्ली में पढ़ाई कर रहा है, दुष्कर्म के एक झूठे मामले में फंस गया है। वीडियो कॉल में कथित पुलिस थाने का माहौल और पुलिसकर्मियों की गतिविधियां दिखाई गईं, जिससे संतोष घबरा गए।
उनसे कहा गया कि यदि वह अपने बेटे को बचाना चाहते हैं तो तुरंत एक बैंक खाते में 35 हजार रुपये जमा करें। घबराए संतोष ने पहले 20 हजार और फिर 15 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। लेकिन कॉल कटने के बाद जब उन्होंने अपने बेटे से संपर्क किया, तो उन्हें ठगी का एहसास हुआ।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
श्रीवास्तव ने तुरंत कमरौली थाने में शिकायत दर्ज कराई। थाना प्रभारी अभिनेष कुमार ने मामले की जांच शुरू की और साइबर अपराधियों के खाते को ट्रैक कर फ्रीज करा दिया। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कराते हुए पीड़ित को उसके पूरे 35 हजार रुपये वापस दिलवा दिए गए।
पीड़ित ने जताया पुलिस का आभार
अपने पैसे वापस पाकर संतोष श्रीवास्तव ने पुलिस का आभार व्यक्त किया और आम जनता से भी सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा, “अगर किसी को भी ऐसी कॉल आए तो तुरंत पुलिस से संपर्क करें और बिना पुष्टि किए कोई लेन-देन न करें।”
साइबर ठगी से बचाव के लिए सावधानियां
1. वीडियो कॉल पर किसी अनजान व्यक्ति की बातों पर विश्वास न करें, चाहे वे खुद को अधिकारी बताएं।
2. अगर कोई पुलिस केस का डर दिखाकर पैसे मांगे, तो तुरंत स्थानीय पुलिस से संपर्क करें।
3. परिवार के सदस्य से तुरंत बातचीत कर स्थिति की पुष्टि करें।
4. जल्दबाजी में पैसे ट्रांसफर करने से बचें और पूरी जांच करें।
5. साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज करें।
कमरौली पुलिस की तत्परता ने यह साबित कर दिया कि सही समय पर कार्रवाई की जाए तो साइबर अपराधियों से लूटी गई राशि वापस पाना संभव है। इस घटना से आम नागरिकों को सतर्क रहने की सीख मिलती है, ताकि वे भविष्य में किसी भी तरह की ऑनलाइन ठगी का शिकार न हों।




