
सीधी। जनजातीय कार्य विभाग के आदिवासी कन्या आश्रम बमुरी में पदस्थ अधीक्षिका श्रीमती सविता नागर को विवादित कार्यशैली के चलते एवं अभिभावकों के आक्रोश तथा छात्रावास के गेट में तालाबंदी के बाद हुई जांच में हटा दिया गया था। श्रीमती नागर को बमुरी विद्यालय में ही एक महीने पहले प्रधानाध्यापक बना दिया गया था। उनके स्थानमें श्रीमती रिया पयासी शासकीय हाई स्कूल बस्तुआ को 16 अक्टूबर 2024 को अधीक्षिका का प्रभार संभालने का आदेश सहायक आयुक्त द्वारा जारी किया गया था। नई अधीक्षिका द्वारा अपना पदभार संभालकर काम भी करना शुरू कर दिया गया था। वहीं प्रधानाध्यापक के पद पर स्थानांतरण होने पर श्रीमती सविता नागर मेडिकल अवकाश में चली गई थी और जुगाढ़ बनाकर फिर से अपना आदेश शासकीय आदिवासी कन्या आश्रम बमुरी के अभीक्षिका पद के लिए करा लिया गया। इस बीच श्रीमती सविता नागर के ऊपर शासकीय आदिवासी कन्या आश्रम बमुरी के लिए अनुरक्षण एवं मरम्मत कार्य के लिए मिली 5 लाख 71 हजार 207 रुपए की राशि में 5 लाख 10 हजार 282 रुपए की राशि मनमानी तौर पर आहरित करने का आरोप भी लगा। जिसके बाद सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग सीधी द्वारा जांच टीम गठित कर दी गई है। जारी आदेश में कहा गया है कि तत्कालीन अधीक्षिका श्रीमती सविता नागर 19 सितंबर 2024 से 20 अक्टूबर 2024 तक कुल 32 दिवसके अवकाश में थी। उक्त अवकाश के समय अधीक्षिका कन्या आश्रम बमुरी के नाम से संचालित खाते से निर्माण, मरम्मत कार्य की राशि एवं अनुरक्षण मद की राशि मनमानी तौर पर बिना कार्यालय की अनुमति से आहरित कर ली गई। इसी प्रकार मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण मद की राशि दिनांक 26 सितंबर 2024 को 50 हजार रुपए विभागाध्यक्ष स्तर से अधीक्षक के बैंक खाते में प्राप्त राशि को भी बिना कार्य कराए आहरित कर ली गई। उक्त राशि के साथ-साथ अन्य मदों की भी राशि आहरित की गई है। उक्त शिकायत की जांच जनजातीय कार्य विभाग सीधी के मंडल संयोजक राजेश प्रसाद पटेल, मंडल संयोजक बृजेन्द्र बुनकर एवं उपयंत्री जनजातीय कार्य विभाग सीधी देवेन्द्र कुशवाहा को सहायक आयुक्त द्वारा पत्र क्रमांक 3410, दिनांक 6 नवंबर 2024 को सौंपी गई है। जांच टीम को जल्द अपना जांच प्रतिवेदन सौंपने के आदेश दिए गए हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि तत्कालीन अधीक्षिका श्रीमती सविता नागरको पद से हटाए जाने पर उनके द्वारा छात्रावास बस्तुआ को विभिन्न मदों से मिली राशियों को बिना कोई कार्य कराए ही आहरित कर लिया गया। जिसे गंभीर कदाचरण की श्रेणी में माना जा रहा है। यदि श्रीमती नागर स्थानांतरण के बाद भी लाखों की राशि छात्रावास के बैंक खाते से आहरित करने में इतनी निर्भय रही हैं तो ऐसे में उनके कार्यकाल में खर्च की गई अन्य राशियों में भी बड़े गोलमाल की पूरी संभात्वना है। इसी वजह से श्रीमती सविता नागर किसी भी तरह से फिर से बस्तुआ छात्रावास का प्रभार हासिल करने के लिए लगातार दौड़धूप कर रही थीं। इसके लिए वह लंबे मेडिकल अवकाश पर भी थीं। बाद में जुगाढ़ बनने के बाद फिर से अभीक्षिका का प्रभार संभालने का आदेश कराने में भी वह पूरी तरह से सफल रही हैं। उनके विवादित कार्यकाल को लेकर उनके फिर से अधीक्षिका का पदभार संभालने के बाद निश्चित ही आगे भी अभिभावकों एवं ग्रामीणों का आक्रोश भड़केगा। उस दौरान विभागीय अधिकारी भी लपेटे में आएंगे।




