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सीधी की बेटी नेपाल बॉर्डर से सकुशल वापस — मझौली पुलिस ने भावनात्मक केस में दिखाई काबिलीयत

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सीधी। पुलिस अधीक्षक श्री संतोष कोरी के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अरविंद श्रीवास्तव एवं एसडीओपी चुरहट/कुसमी श्री आशुतोष द्विवेदी के मार्गदर्शन में चल रहे ‘मुस्कान अभियान’ ने आज मानवीय संवेदनाओं की एक नई इबारत लिखी है। खाकी के लिए कोई भी दूरी बाधा नहीं बन सकती, इसे सिद्ध करते हुए थाना मझौली पुलिस ने अदम्य साहस और सूझबूझ का परिचय दिया और नेपाल बॉर्डर से एक लापता बेटी को सुरक्षित दस्तयाब किया है।

 

हृदयविदारक पृष्ठभूमि और घटनाक्रम

 

8 जनवरी 2025 को थाना मझौली में किशोरी की गुमशुदगी दर्ज हुई थी। इस मामले की तह में जाने पर एक अत्यंत भावुक पहलू सामने आया। किशोरी की माँ का पूर्व में ही स्वर्गवास हो चुका था। माँ की ममता की छांव खोने के बाद बच्ची भावनात्मक रूप से टूट चुकी थी। इसी बीच पिता की किसी बात पर डांट से नाराज होकर उसने आवेश में घर छोड़ दिया और भटकते हुए मीलों दूर चली गई।

 

लंबी जद्दोजहद और मुखबिरों के सटीक इनपुट के बाद पुलिस टीम पहले भारत-नेपाल बॉर्डर पर स्थित बहराइच (उ.प्र.) पहुंची। वहां सुराग मिला कि बेटी नेपाल बॉर्डर के पास नेपालगंज की ओर है। बिना वक्त गंवाए, सीधी पुलिस ने स्थानीय पुलिस/सुरक्षा एजेंसियों से समन्वय स्थापित किया और उसे सुरक्षित दस्तयाब किया।

 

भावुक पल

 

जब महीनों बाद बेटी अपने पिता और परिजनों के सामने आई, तो दृश्य अत्यंत मार्मिक था। जिस पिता की डांट से नाराज होकर बेटी गई थी, आज उसे सुरक्षित देख उस पिता की आंखों से पश्चाताप और खुशी के आंसू छलक पड़े। पिता ने बताया कि माँ के जाने के बाद बेटी ही उनकी दुनिया थी, उसके चले जाने से वे जीवित लाश बन गए थे। उन्होंने नम आंखों से पुलिस टीम के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की कि उनकी बच्ची को एक अनिश्चित और कठिन जीवन से बचाकर वापस उनकी गोद में लौटा दिया गया।

 

पुलिस टीम

 

इस अभियान में थाना प्रभारी मझौली उनि. विशाल शर्मा, सउनि अरुण सिंह, प्रधान आरक्षक शंकर राज सिंह, महिला आरक्षक जान्हवी तिवारी एवं आरक्षक कृष्ण मुरारी द्विवेदी की भूमिका निर्णायक रही।

 

पुलिस अधीक्षक श्री संतोष कोरी ने कहा

“‘मुस्कान अभियान’ का उद्देश्य परिवारों के चेहरों पर खोई हुई मुस्कान लौटाना है। यह बच्ची पहले ही माँ का साया खो चुकी थी, ऐसे में उसे सुरक्षित पिता तक पहुँचाना हमारी नैतिक जिम्मेदारी थी। नेपाल बॉर्डर क्षेत्र से बेटी की सकुशल दस्तयाबी हमारी टीम के मानवीय संवेदनाओं और कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण का परिणाम है।”

 


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