कश्मीर

निंदनीय इनकार: पाकिस्तान ने झाड़ा पल्ला, भारत पर लगाए गंभीर आरोप

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Pakistan on jammu & kashmir attack: जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए भयावह आतंकवादी हमले पर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की प्रतिक्रिया सामने आई है, जो निराशाजनक और अस्वीकार्य है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बेशर्मी से कहा कि इस हमले से उनका कोई लेना-देना नहीं है। इतना ही नहीं, उन्होंने एक कदम आगे बढ़ते हुए पाकिस्तानी टीवी न्यूज चैनल पर बयान देते हुए आरोप लगाया कि इस कायराना हमले के पीछे भारत के लोग ही शामिल हैं।

 

ख्वाजा आसिफ ने निराधार आरोप लगाते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में लोग सरकार के खिलाफ बगावत कर चुके हैं। उन्होंने नागालैंड, मणिपुर और कश्मीर का जिक्र करते हुए दावा किया कि वहां के लोग सरकार से नाराज हैं। उनके अनुसार, भारत में “हिंदुत्व वाली सरकार” लोगों के अधिकारों का हनन कर रही है और उनका शोषण कर रही है, जिसके खिलाफ लोग उठ खड़े हुए हैं।

 

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने अपने विवादित बयान को और आगे बढ़ाते हुए कहा कि भारत की मौजूदा सरकार वहां रहने वाले अल्पसंख्यकों – बौद्ध, ईसाई और मुसलमानों – को परेशान कर रही है। उन्होंने सनसनीखेज आरोप लगाया कि लोगों का “कत्लेआम” किया जा रहा है और इसके खिलाफ आवाज उठाने वालों को दबाया जा रहा है। उन्होंने अंत में कहा कि इस तरह की आतंकवादी घटना से उनका कोई संबंध नहीं है और वह नागरिकों पर हुए ऐसे हमलों की निंदा करते हैं।

 

त्वरित प्रत्युत्तर: प्रधानमंत्री मोदी ने लौटते ही संभाला मोर्चा, उच्च स्तरीय बैठक

 

वहीं दूसरी ओर, भारत ने इस गंभीर आतंकवादी घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद उत्पन्न स्थिति पर तत्काल चर्चा की। बुधवार (23 अप्रैल) की सुबह सऊदी अरब से लौटने के तुरंत बाद, उन्होंने हवाई अड्डे पर ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की।

 

अधिकारियों ने जानकारी दी कि इस महत्वपूर्ण बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी मौजूद थे। बैठक का मुख्य उद्देश्य पहलगाम में हुए जघन्य आतंकवादी हमले के बाद के हालात का आकलन करना और आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श करना था। अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार को दक्षिण कश्मीर के प्रमुख पर्यटन स्थल पहलगाम में हुए इस आतंकवादी हमले में कम से कम 26 निर्दोष लोग मारे गए और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। दुखद रूप से, मारे गए लोगों में दो विदेशी नागरिक भी शामिल थे, जिनमें से एक संयुक्त अरब अमीरात से और दूसरा नेपाल से था।

 

यह आतंकवादी हमला न केवल निर्दोष नागरिकों पर एक कायरतापूर्ण हमला है, बल्कि यह क्षेत्र की शांति और सुरक्षा को भंग करने का भी प्रयास है। प्रधानमंत्री की त्वरित प्रतिक्रिया और उच्च स्तरीय बैठक इस बात का संकेत है कि भारत इस आतंकवादी कृत्य को हल्के में नहीं लेगा और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए हर संभव कदम उठाएगा। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का गैर-जिम्मेदाराना बयान ऐसे समय में और भी निंदनीय है जब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए।


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