विंध्य प्रदेश

रीवा में बनाई जा रही नकली सीमेंट का खुलासा, शहर से दूर जंगल में रची जा रही थी यह वारदात 

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रीवा। रीवा जिले से करीब 65 किलोमीटर दूर, घूमा-नईगढ़ी मार्ग के पास जंगल में चल रहे नकली सीमेंट निर्माण के गोरखधंधे का पर्दाफाश हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार इस अवैध कारोबार की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन ने तत्परता दिखाई और मौके पर पहुंचकर बड़ी कार्यवाही की।

 

कैसे हुआ खुलासा?

मिली जानकारी के अनुसार सूचना मिलने पर एसडीओपी मऊगंज और नईगढ़ी थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने वहां मौजूद नकली सीमेंट की भारी मात्रा में बोरियां जब्त कीं और उन्हें ट्रैक्टरों में लोड कर सील कर दिया। यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह का मामला सामने आया है। इससे पहले भी मनगवां, नईगढ़ी और सोहागी थाना क्षेत्र में नकली सीमेंट बनाने के कई मामलों का खुलासा हो चुका है।

 

कैसे चल रहा था यह गोरखधंधा?

जानकारों के अनुसार, नकली सीमेंट बनाने वाले कारोबारी स्थानीय अधिकारियों के संरक्षण में यह धंधा चला रहे थे। विभिन्न कंपनियों की असली बोरियों में सीमेंट और राखड़ मिलाकर पैकिंग की जाती थी और फिर बाजार में बेचा जाता था। इस घटिया सीमेंट से बनाए गए मकान और सड़कें जल्दी ही खराब हो जाते हैं, जिससे आम जनता को भारी नुकसान झेलना पड़ता है।

 

सूत्रों का कहना है कि सरकारी सप्लाई में आने वाली सीमेंट भी इस अवैध धंधे में इस्तेमाल की जाती थी। इसे खरीदकर उसमें मिलावट की जाती और फिर ऊंचे दामों में बेचा जाता था। इस अवैध व्यापार में प्रतिस्पर्धा इतनी बढ़ गई थी कि खुद कारोबारी एक-दूसरे के खिलाफ मुखबिरी करने लगे थे।

 

बार-बार खुलासा, फिर भी कार्रवाई अधूरी!

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि नकली सीमेंट का यह धंधा पहले भी कई बार पकड़ा जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद यह बेरोकटोक चलता रहा। सीमेंट कंपनियों और प्रशासन की लापरवाही से यह अवैध कारोबार फलता-फूलता रहा। हालांकि, इस बार नईगढ़ी थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर ने अपनी टीम के साथ बड़ी कार्यवाही कर इस रैकेट का भंडाफोड़ किया है।

 

अब देखना यह होगा कि इस मामले की जांच में और कौन-कौन से बड़े नाम सामने आते हैं और क्या इस पर स्थायी रूप से रोक लगाई जा सकेगी या फिर यह गोरखधंधा फिर से शुरू हो जाएगा।


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