_रीवा में खुला स्मार्ट कोर्ट, न्याय का द्वार देखने पहुंचे सुप्रीम कोर्ट और MP हाईकोर्ट के जज_*

*_रीवा में खुला स्मार्ट कोर्ट, न्याय का द्वार देखने पहुंचे सुप्रीम कोर्ट और MP हाईकोर्ट के जज_*
रीवा। रविवार का दिन विंध्य के लिए ऐतिहासिक हो गया. रीवा को आज आधुनिक नवीन न्यायालय भवन की सौगात मिल गई. नवीन कोर्ट परिसर में आयोजित उद्घाटन समारोह में देश के सर्वोच्च न्यायालय और मध्य प्रदेश के हाईकोर्ट से आए न्यायधीशों की उपस्थिति में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने फीता काटकर कोर्ट भवन का लोकार्पण किया. आयोजित समारोह में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला सहित जिला कोर्ट के जज और बड़ी तादात में अधिवक्तागण उपस्थित रहे. सर्वसुविधायुक्त नवीन न्यायालय भवन की लागत 95.93 करोड़ है. तीन बिल्डिंग वाले इस न्यायालय भवन का क्षेत्रफल 35123.66 वर्ग मीटर है.
तीन बिल्डिंग वाला है रीवा का नवीन न्यायालय भवन
नवीन जिला सत्र न्यायालय परिसर यूनिवर्सिटी रोड में स्थित इंजिनियरिंग कॉलेज के ठीक सामने है. मुख्य मार्ग से ही न्यायालय भवन की भव्यता निहारी जा सकती है. न्यायालय परिसर में तीन भवन बनाए गए हैं, जिसमें से एक मुख्य बिल्डिंग, सर्विस बिल्डिंग और बार बिल्डिंग शामिल है. नवीन जिला न्यायालय के तीनों भवनों का कुल क्षेत्रफल 35123.66 वर्ग मीटर है. जिसमें मुख्य भवन का क्षेत्रफल 18224.58 वर्ग मीटर, सर्विस बिल्डिंग का क्षेत्रफल 8439.54 वर्ग मीटर तथा बार बिल्डिंग का क्षेत्रफल भी 8439.54 वर्गमीटर है.
95.93 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ न्यायालय परिसर
इसके निर्माण के लिए मध्य प्रदेश विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा कुल 95.93 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई. न्यायालय भवन का लेआउट अक्टूबर 2017 में स्वीकृत किया गया था. इसका आर्किटेक्चर, मेसर्स डिजाइन एसोसिएट नई दिल्ली द्वारा तैयार किया गया था. नव निर्मित न्यायालय के मुख्य भवन में 40 कोर्ट रूम, शासकीय कार्यालय, कान्फ्रेंस हाल, डिजास्टर कंट्रोल रूम, पब्लिक प्रोसिक्यूशन ऑफिस, डिस्ट्रिक्ट प्रोसिक्यूशन ऑफिस, फाइलिंग काउंटर, रिकार्ड रूम, जज लान्ज, कम्प्यूटर रूम, लाईब्रोरी, पैन्ट्री एवं कॉमन टायलेट की सुविधा है.
750 अधिवक्ताओं के लिए 296 चेम्बर
नव निर्मित न्यायालय के सर्विस बिल्डिंग में होल्डिंग सेल, पुलिस चौकी, पब्लिक प्रोसिक्यूटर, कॉमन रूम, रिकार्ड रूम, मेन ऑफिस, नाजिर ऑफिस, नजारत, एकाउंट ऑफिस, मालखाना कक्ष, स्टैटिक ऑफिस कक्ष, स्टेशनरी कक्ष, गवर्मेंट रीडर तथा लगभग 750 अधिवक्ताओं के लिए तीन हाल की सुविधा प्रदान की गई है. नवीन न्यायालय के बार बिल्डिंग में बैंक, पोस्ट ऑफिस, डिस्पेंसरी बार, लाइब्रेरी, पिटिशन राइटर, कैंटीन, स्टोर रूम और अधिवक्ताओं के लिए 296 कक्ष बनाए गए हैं. इसके अलावा यहां पार्किंग की विशेष सुविधा भी उपलब्ध है. इस न्यायालय परिसर को आधुनिक और विशाल रूप दिया गया है.
सुप्रीम कोर्ट के 3 और हाईकोर्ट के 5 जज लोकार्पण में शामिल
आयोजत नवीन न्यायालय भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सूर्यकांत शर्मा, जेके महेश्वरी, एस सी शर्मा सहित हाईकोर्ट के न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत, संजीव सचदेवा, विशाल मिश्रा, संजय द्विवेदी, श्री कांत सिंह एडवोकेड जनरल के अलावा उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला सहित सांसद जनार्दन मिश्रा, विधायक और बड़ी तादाद में स्थानीय जिला न्यायालय के जज और अधिवक्ता गणों के साथ आम जनता भी उपस्थित रही.
आयोजित समारोह में उपस्थिति मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि, ”हमारा सौभाग्य है की इतने भव्य न्यायालय भवन का लोकार्पण हो रहा है, तो उतना समृद्ध मंच हमारे बीच है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज यहां उपस्थित हैं.”
1834 में महाराजा विश्वनाथ सिंह ने रीवा रियासत को दीं थी भवन की सौगात
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि, ”न्याय के इस मंदिर के लोकार्पण के अवसर पर 1834 में महाराजा विश्वनाथ सिंह ने अपने उस काल में दरबारों से न्याय की पद्धति के बजाय पहली बार प्रदेश के अंदर सार्वजनिक स्तर पर न्याय की सुलभता के लिए भवन बनाकर रीवा रियासत को दिया था. इसके लिए मैं उनका भी स्मरण करना चाहूंगा. आज एक बार फिर इतिहास ने करवट बदली है उस समय लिए गए संकल्प के बलबूते पर भवन का गौरव प्राप्त हुआ था. अब जब यहां पर बना नवीन न्यायालय जो पूरे राज्य का सर्वश्रेष्ठ न्यायालय भवन बना है यह भी गौरव आज हमें प्राप्त हुआ है.”
न्याय की देवी के आंखों पर होती थी पट्टी
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि, ”आज के दौर में कुछ उदाहरण हमारे सामने आते हैं. न्याय की देवी की आंख में पट्टी बंधे यह हमारे समझ से परे था. सर्वोच्च न्यायालय के तीनों न्यायमूर्ति यहां पर बैठे हुए हैं. आपके समय आंख की पट्टी खोलने का जोड़ने का काम भी और अतीत के जड़ों से जुड़ने का काम भी हमारे सामने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नए कानूनों के बाद हुआ है.”
आपातकाल काल था लोकतंत्र के लिए काला धब्बा
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आगे कहा कि, ”आपातकाल हमारे लोकतंत्र के लिए एक काला धब्बा था, जिसके आधार पर पता नहीं क्या क्या माना गया. लेकिन मुझे इस बात की प्रसन्नता है की 1984 में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी पवित्रता के बलबूते पर तीन तलाक का फैसला देकर न्यायालय की गरिमा बधाने का काम किया है.”
”उस समय हमारा प्रजातंत्र थोड़ा कमजोर था, वोट के चक्कर में हो या कुछ भी कारण से, उस समय इतने अच्छे और पवित्र फैसले को लोकसभा के माध्यम से कानून बनाकर बदला गया. लेकिन मैं देश के लिए धन्यवाद देना चाहूंगा की उसको देश ने बर्दास्त किया लेकिन आज इस लिए देश भी आगे बढ़ा और लोकतंत्र भी मजबूत हुआ. 500 साल पुराना जब अयोध्या के राम मंदिर का फैसला हुआ उसके लिए हम सर्वोच्च न्यायालय का धन्यवाद देते हैं.”




